इस कहावत का अर्थ है -“ एक पीढ़ी के धरोहर अगली पीढ़ी के लिए बेकार होते हैं या कहें कि अगली पीढ़ी के लिए वे बहुत ज्यादा मायने नहीं रखते हैं.” सास के लिए जो ओढना बहुत महत्वपूर्ण है, दिल के करीब है, अजीज है....वो पतोहू के लिए नाक पोछने योग्य ही माना जाता है.....यही होता है.....कड़वा सत्य......
भारत के जन जीवन में कहावतों का बहुत प्रयोग होता है. कहावतें जीवन के अनुभव का निचोड़ होते हैं. यह व्यबहार के धरातल पर साबित होने के कारण ही दुनिया और समाज में लोकप्रिय होता जाता है. यह लोगों के बोलचाल से ही जन्म लेता है....यह पहले प्रयोग में आता है फिर ये पुस्तकों में अपना स्थान पा लेते हैं....
कहावतें जीवन के सच्चे तथा कड़वे सत्य को बयान करते है. हम दावे के साथ कह सकते हैं कि ये शाश्वत सत्य होतें है. आज के पोस्ट को मैंने यह शीर्षक इसलिए दिया है कि जरा इस कड़वे सत्य से एक बार फिर रूबरू हो जाया जाए.
आज शहनाई उस्ताद , भारत रत्न –“स्वर्गीय बिस्मिल्लाह खान “ की जयन्ती है.......२१ मार्च....
आज सुबह से ही मैंने कई न्यूज चैनलों पर छान-बीन की. किसी भी राष्ट्रीय कहे जाने बाले चैनलों पर एक भी समाचार उस्ताद के बारे में नहीं दिखा....चाहे वो “सबसे तेज” का दावा करें , “आपको रखे सबसे आगे” या कोई भी विशेषण जुड़ा हुआ अन्य टीवी चैनल हों.... इन्हें ज़रा भी शर्म नहीं है....दो लाइन का न्यूज नहीं दिखा सकते.....दोपहर के दो बजे तक केवल “इ-टीवी, यूपी..और बिहार “ पर ही न्यूज आये....दो-तीन मिनट के...
किसलिए भारत रत्न ?....किसका भारत रत्न ?...क्यों ?.....
लेकिन प्रश्न उठाने का कोई मतलब भी नहीं है....वही कड़वा सत्य.....
लेकिन प्रश्न है......?
अभी उस्ताद को सुनी पीढ़ी मौजूद है....अभी पीढ़ी बदली नहीं है.....
हम बापू, शास्त्री, नेहरू, गांधी, लोहिया, जेपी, भगत सिंह, आजाद,...के जमाने के नहीं हैं.......
लेकिन उस्ताद के जमाने के तो हैं ही.....
यही हाल रहा तो हम “लता दीदी” को भी भूलने में देर नहीं करेंगे.......
फिर....सचिन को भारत रत्न देने की मांग करने बाले उसकी भी ऐसे ही बे-इज्जती करेंगे......
आज टीवी चैनलों पर छाया रहा---आई.पी.एल. की बोली, क्रिकेट, रानी मुखर्जी का जन्म दिन....और न जाने क्या—क्या....
हे भारत के महापुरुषों....हमें माफ करना....
हमारी याददाश्त गजनी फिल्म के आमिर खान की तरह हो गयी है....
अब अगली पीढ़ी दस साल में नहीं आती.....
अब तो नयी पीढ़ी दस दिन में आ जाती है....
हम तुम्हें दस दिन भी याद नहीं रख पायेंगे.....
हमें माफ करना........
हो सकता है.....रात को सोते समय याद रहे....
सुबह...तुम्हारा ओढना...हमारे नाक पोछने के काम में आ जाएगा....
हमें माफ करना....
कहावत तो आप ही छोड़कर गए हैं न ....आप तो अच्छी तरह समझते हैं.....
सास का ओढना.....पतोहू का नक्पोछना.....
कड़वा सत्य....शाश्वत सत्य......




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